Modi’s Mission NSG

SWITZERLAND VISIT

पांच देशों की यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल देर रात स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं. आज यहां उनकी स्विस राष्ट्रपति जोहान श्निडर अम्मान के साथ मुलाकात होनी है.

इस यात्रा पर जाने से पहले मोदी ने स्विट्जरलैंड को यूरोप में भारत के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में से एक बताया था. कहा जा रहा है कि इस यात्रा मुख्य मकसद परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह – एनएसजी में भारत की सदस्यता पर स्विट्जरलैंड सरकार समर्थन हासिल करना और कालेधन से जुड़े मसलों पर समझौता करना है.

स्विट्जरलैंड परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य है. 48 देशों का यह संगठन परमाणु सामग्री और तकनीकी के आयात-निर्यात पर नजर रखता है. भारत ने हाल ही में इसकी सदस्यता के लिए आवेदन किया है. सदस्यता मिलने के लिए जरूरी है कि संगठन के सभी सदस्य इसपर सहमति जताएं.

माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति अम्मान से मुलाकात के दौरान भारतीय नागरिकों के स्विस बैंकों में जमा काले धन के मुद्दे पर भी बातचीत करेंगे.

स्विट्जरलैंड भारत का पांचवां सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार है और यहां निवेश करने वाले देशों में उसका 11वां स्थान है. यूरोप का यह देश नवीनीकृत ऊर्जा और व्यवसायिक शिक्षा के मामले में काफी आगे है. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान इन दोनों क्षेत्रों में सहयोग के लिए भी समझौता होने की उम्मीद जताई जा रही है.

AMERICA VISIT

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भारत को बड़ी सफलता मिली है. अब भारत के लिए मिसाइल तकनीक के प्रसार पर नजर रखने वाले देशों के समूह मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सदस्य बनने का रास्ता साफ हो गया है. इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दौरे पर हैं और एमटीसीआर में भारत के प्रवेश को उनकी कूटनीतिक जीत कहा जा रहा है.

भारत ने 34 देशों वाले समूह एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था. सोमवार को भारत की सदस्यता पर आपत्ति जताने का आखिरी दिन था और किसी भी सदस्य देश ने इसपर आपत्ति नहीं जताई.

एमटीसीआर के चार सदस्य देशों के राजनयिकों ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि भारत के खिलाफ आपत्ति दर्ज न होने की वजह से अब ‘साइलेंट प्रोसीजर’ या मूक प्रक्रिया के तहत भारत को स्वतः ही समूह में प्रवेश मिल जाएगा. एमटीसीआर में प्रवेश के बाद भारत उच्च स्तर की मिसाइल तकनीक और उच्च क्षमता वाले ड्रोन खरीद सकेगा साथ ही कुछ नियमों के तहत इनका निर्यात भी कर सकेगा.

एमटीसीआर की स्थापना 1987 में मानव रहित सामूहिक विनाश के हथियारों की प्रणाली का प्रसार रोकने के लिए हुई थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च तकनीक के प्रसार को नियंत्रण में रखने की चार प्रमुख व्यवस्थाएं हैं जिनमें परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों का समूह एनएसजी भी शामिल है. भारत ने पिछले महीने एनएसजी में शामिल होने के लिए भी आवेदन दिया है. एनएसजी नौ जून को वियना में और 24 जून को सोल में होने वाली बैठकों में उसके आवेदन पर विचार करेगा.

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