NEET 2016 : Solution Or Problem for students?

भारत के लिए यह बात बहुत सुनी होगी की इस देश में बच्चे के पैदा होने से पहले ही माँ बाप सोच लेते हैं की बीटा हुआ तो डॉक्टर और बेटी हुई तो हम इसी इंजिनियर बनायेंगे| इंजिनियर की पढाई जहा सिर्फ 4 साल की होती हैं वाही डॉक्टर बन ने में वर्षो लग जाते हैं … लेकिन उस से भी पहले डॉक्टर बन ने के कोर्स यानी MBBS (Bachelor of Medicine & Bachelor of Surgery) और BDS  (dental surgery) के लिए Entrance exam यानी प्रवेश परीक्षा को पास करने के लिए भी कुछ विद्यार्थी साल – दो साल का समय लेते है तेयारी के लिए ताकि उनके मनचाहा कॉलेज उनको मिल सके ..कुछ को मिल जाता हैं तो कुछ के सपने टूट जाते हैं … क्योंकि NEET यानी  National Eligibility cum Entrance Test किसी बड़ी चुनोतियो से कम नहीं होता ..इसके लिए दिन रात विद्यार्थियों को मेहनत करनी पड़ती हैं … लेकिन सुप्रीम कोर्ट का NEET से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण फैसला , जो हाल ही में आया हैं .. क्या वो छात्रों के लिए वरदान हैं या मुसीबत ? अब NEET पर सियासत होने लगी है  और यह एक बहस का मुद्दा बन गया हैं …| 

NEWS : तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की खंडपीठ ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) के जरिए पूरे देश में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में प्रवेश देने की योजना को रद्द कर दिया था। मगर अब पांच जजों की संविधान पीठ ने 2013 के उस निर्णय को वापस ले लिया है।

NEET 2016 Latest News

बता दे की जो AIPMT (All India Pre Medical Test )पहले मेडिकल के लिए प्रवेश परीक्षा दी जाती थी अब वह बंद इस वर्ष कर दी गई हैं ..और अब सिर्फ मेडिकल के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी जो हैं NEET.. केंद्र और CBSE ने यह बात कही हैं की  NEET की परीक्षा को दो Phase (अवस्था ) में करेंगे जिसमे 6.5 लाख विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा में इम्तिहान देंगे ..और पहला फेज की परीक्षा मई 1 को होगी वाही दूसरी परीक्षा जुलाई 24 को होगी ..जिसमे 2.5 लाख विद्यार्थी परीक्षा दे सकेंगे .. और इसका परिणाम अगुस्त 17 को सामने आयेगा |

शुक्रवार सुबह अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि गुरुवार के आदेश में कुछ संशोधन की ज़रूरत है, क्योंकि इससे लाखों छात्र भ्रमित हो गए हैं।

  • 1 मई की परीक्षा रद्द कर दी जाए और 24 जुलाई को ही सभी के बदले एक परीक्षा करा ली जाए।

  • बहुत से राज्यों में वहां की भाषा में परीक्षा होती है, जबकि सीबीएसई सिर्फ अंग्रेज़ी हिन्दी में इम्तहान लेती है।

  • 24 जुलाई को होने वाली परीक्षा हिन्दी अंग्रेज़ी के अलावा 6 अन्य भाषाओं में कराई जाए।

  • जिन राज्यों में परीक्षा हो चुकी है और जहां प्रस्तावित है उन्हें इस साल नई व्यवस्था से बाहर रखा जा सकता है।

इस परीक्षा में सिर्फ मेडिकल ही नहीं, बल्कि अन्य पेशेवर कोर्स भी शामिल हैं। एआईपीएमटी और दूसरी परीक्षाओं के पैटर्न और तैयारी की रणनीति में भी अंतर होता है। जैसे छत्तीसगढ़ के एक छात्र ने बताया कि उनके यहां निगेटिव मार्किंग नहीं है। सौ नंबर का भौतिकी और रसायन शास्त्र और 100 नंबर का जीव और जंतु विज्ञान। एआईपीएमटी में 720 नंबर का इम्तहान होता है और निगेटिव मार्किंग होती है। किसी ने बताया कि बिहार में तीस प्रतिशत नंबर एनसीईआरटी से होता है, बाकी राज्य के सिलेबस से। जबकि एआईपीएमटी में 80 फीसदी एनसीईआरटी से होता है।

संकल्प चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम भारत सरकार व अन्य केस में पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि अब से देश में मेडिकल की एक ही प्रवेश परीक्षा होगी। जिसे नेशनल एलिजब्लिटी कम इंटरेंस टेस्ट (NEET) कहा जाएगा। चाहे सरकारी कॉलेज हों या अर्ध सरकारी या प्राइवेट। ज़्यादातर पक्ष इसके लिए तैयार हो गए। 

प्राइवेट कॉलेजों ने इस साल नीट के तहत टेस्ट कराए जाने का विरोध किया है। संविधान पीठ के इस फैसले से देश भर के करीब 600 मेडिकल कॉलेज प्रभावित होंगे। कहा जा रहा है कि यह एक उचित व्यवस्था है, जिससे प्राइवेट कालेजों की मनमानी पर रोक लगेगी और VYAPAM जैसे सर्वव्यापी घोटाले नहीं होंगे।

यह उन लाखों छात्रों के लिए खुशखबरी है, जिन्हें देश के 400 से ज्यादा मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अलग-अलग परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। अलग-अलग फॉर्म भरने और प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए विभिन्न् स्थानों की यात्रा करने की परेशानी वे उठाते रहे हैं। अब अंडरगे्रजुएट की लगभग 31,000 सीटों के लिए एक ही परीक्षा होगी, तो वे ऐसी मुश्किलों से बचेंगे। ऐसा ही पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्सेस में भी होगा, जिनमें 11,000 से अधिक सीटें हैं। 

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा है कि विभिन्न् राज्यों में अलग-अलग पाठ्यक्रम से पढ़ाई होती है। ऐसे में इस साल आखिरी वक्त पर सीबीएसई के कोर्स के अनुरूप प्रवेश परीक्षा को अनिवार्य बनाना उन छात्रों से नाइंसाफी होगी, जिनकी स्कूली शिक्षा सीबीएसई के पाठ्यक्रम के मुताबिक नहीं हुई है। इसीलिए एनईईटी की शुरुआत शायद अगले वर्ष ही हो पाएगी। 

वैसे एक समस्या तमिलनाडु की भी है। वहां मेडिकल/डेंटल कॉलेजों में दाखिला 12वीं कक्षा के नतीजों के आधार पर मिलता है। साथ ही वहां सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति एवं ओबीसी के लिए 69 फीसदी आरक्षण का प्रावधान कर रखा है। यह एक सियासी मुद्दा है। अत: संभावना है कि तमिलनाडु सरकार एनईईटी रोकने के लिए भरसक कानूनी दांव-पेंच अपनाएगी। मगर सभी सरकारों तथा राजनीतिक दलों से अपेक्षित यही है कि वे देश में मेडिकल/डेंटल की पढ़ाई का समान स्तर कायम करने के इस प्रयास में बाधक ना बनें। 

दरअसल, उसका लाभ मेडिकल/डेंटल शिक्षा को धंधे में तब्दील करने वाले मुनाफाखोर उठा रहे थे। कॉमन टेस्ट से उनका शिकंजा टूटेगा। मेडिकल/डेंटल की पढ़ाई में योग्यतम लोग आएं और डॉक्टरी पेशे की पुरानी गरिमा वापस लाएं, यह अत्यंत आवश्यक है। संतोषजनक है कि इस दिशा में एक अहम शुरुआत होने जा रही है।

13.5..20169 (4.56AM) SOURABH

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