Controversy over KohiNoor

क्या भारत को कभी कोहिनूर हीरा वापस मिल पाएगा? 13वीं शताब्दी में खोजा गया यह कीमती पत्थर अंग्रेजों ने 1850 में पंजाब के महाराजा दिलीप सिंह से हासिल किया था. भारत अंग्रेजों से जिन ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासतों को सौंपने की मांग करता है उनमें कोहिनूर सबसे ऊपर है. लेकिन इसकी भारत में वापसी बड़ा ही पेचीदा मुद्दा है.

पिछले साल कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी में भाषण देते हुए मांग की थी कि ब्रिटेन की सरकार को भारत की लूटी गई या नष्ट की गई कलाकृतियों के एवज में हर्जाना देना चाहिए. इसके बाद ब्रिटेन में भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज ने कोहिनूर भारत को वापस दिए जाने का समर्थन किया था.

पिछले दिनों कोहिनूर फिर चर्चा में आ गया है. एक याचिका के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोहिनूर अंग्रेजों को तोहफे में दिया गया था और इसलिए भारत का इसपर दावा नहीं बनता. मंत्रालय के इस रुख पर जब विवाद बढ़ा तो सरकार ने यूटर्न लेते हुए दावा किया कि वह टावर ऑफ लंदन में रखे गए इस हीरे को वापस लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है.

भारत की तरह पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान भी कोहिनूर को अपनी राष्ट्रीय विरासत मानते हैं और इसपर दावा करते हैं. लेकिन भारत के लिए यह अकेली राष्ट्रीय विरासत नहीं है जो विदेशी धरती पर मौजूद है और जिसपर वह दावा करता है. ऐसी और भी प्राचीन कलाकृतियां या धरोहरें विदेशी शासक लूटकर ले गए थे या वे बाद में तस्करी के जरिए वहां पहुंची हैं. इक्का-दुक्का मामलों में भारत सरकार को ये कलाकृतियां हासिल करने में सफलता मिली है

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