आखिर क्या है असहिष्णुता?

आखिर क्या है असहिष्णुता?

असहनशीलता, अतितिक्षा, अक्षांति, अमर्ष ये सभी असहिष्णुता के ही पर्यायवाची हैं इसका अर्थ है कि जब किसी देश में जनता की बात अनसुनी की जाए आैर उनके बोलने की आज़ादी पर पाबंदी लगाई जाए। किसी ख़ास समुदाय पर उनकी जन-जाति पर अभद्र टिप्पणी करना भी असहिष्णुता का ही हिस्सा है। हमारे देश में पिछले कुछ दिनों से असहिष्णुता पर बवाल आैर सवाल रोज खड़े हो रहे हैं। नेता इसे चुनावी मुद्दा बना रहे हैं तो वहीं अब अभिनेता भी इस मुद्दे पर बढ़ चढ़ कर बयानबाजी करते नज़र आ रहे हैं। कोई खुद को देश में असुरक्षित महसुस कर रहा है तो कोई देश को छोड़ कर जाने की बात कर रहा है। आखिर इसकी वज़ह क्या है इस तरह की बयान बाजी और  देश छोड़ने की बातें मन में एक उन्माद पैदा करती है कि हिंदू प्रधान देश में यदि तीन मुसलमान आमीर,सलमान आैर शाहरुख़ ख़ान सुपरस्टार हो सकते हैं तो देश में असहिष्णुता कहाँ पर है आैर इस से जाहिर है की भारत असहनशील देश नहीं है। जिस देश में उपराष्ट्रपति एक मुसलमान हो आैर राष्ट्रपति हिंदू हो एेसे में असहिष्णुता का तो सवाल ही नहीं उठता। जिस देश में ए.पी.जे अब्दुल कलाम जैसे पूर्व राष्ट्रपति की पुजा की जाती हो उस देश में असहिष्णुता का मुद्दा मन को हिला देता है। जो साहित्यकार कभी अपनी क़लम के दम पर समाज को सही रास्ता दिखाने का हौसला रखते थे आज उनकी क़लम की रोशनी कमजोर सी नज़र आ रही है। अब सवाल उठता है कि आख़िर सरकार जनता तक असहिष्णुता का सही मतलब समझाने में असमर्थ क्यों दिख रही है?

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