ARUNACHAL PRADESH Politics

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को मंजूरी दे दी है. सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उन्हें राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की सिफारिश के कारण बताए थे जिसके बाद आज राष्ट्रपति ने यह मंजूरी दी है. बताया जाता है कि राजनाथ सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 174(1) का हवाला देते हुए राष्ट्रपति को बताया था कि विधानसभा के दो सत्रों के बीच छह महीनों से ज्यादा का अंतर नहीं हो सकता है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में पिछला विधानसभा सत्र 21 जुलाई को समाप्त हुआ था और छह महीनों के भीतर यानी 21 जनवरी तक दोबारा शुरू नहीं हो सका है. इसके बाद राज्य में पैदा हुए सियासी संकट को देखते हुए राष्ट्रपति ने अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की अनुमति दे दी. वहीं, कांग्रेस ने केंद्र की सिफारिश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है.

बता दें कि 60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में कांग्रेस के 47 विधायक थे. इनमें से 21 ने बग़ावत कर दी, जिसके बाद नबाम टुकी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी. बागी विधायकों ने भाजपा के 11 विधायकों के साथ मिल कर कांग्रेस सरकार को हटाने का प्रयास किया था लेकिन, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए बागियों के इन प्रयासों को सफल नहीं होंने दिया. उसने अंतरिम आदेश के रूप में 2 फरवरी तक राज्य विधानसभा की कार्यवाही पर रोक लगा दी. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम टुकी ने दावा किया है कांग्रेस के पास 31 विधायकों का समर्थन है. उनके मुताबिक 16 विधायकों को छोडकर बाकी सब वापस लौट आए हैं.

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