MY THOUGHTS MY VIEW SPECIAL :- नम आँखों से कलाम को विदाई by sourabh prajapat

30 जुलाई : आज के दिन दो जनाजे निकले , एक नायक का तो दूसरा खलनायक का !

जी हां नायक , हमारे प्यारे मिसाइल मेन … डॉ . एपीजे अब्दुल कलाम जी , जिन्होंने हम सबका साथ 27 जुलाई को छोड़ दिया .. हमे पूरा यकींन है की सर का जन्नत से भी हमारे भारत पर हमेशा आशीर्वाद रहेगा .. आज उनको रामेश्वरम में अंतिम विदाई दी गई , पिछले 3 दिनों में उनके प्रति लोगो का प्यार देख कर यकीन  हो गया की इंसान कर्म से बड़ा होता है , धर्म से नहीं …

CHENNAI, JULY 28 (UNI):- A student breaks down while paying tribute to former president A P J Abdul Kalam at Everwin Matric School, in Chennai on Tuesday. UNI PHOTO-47U
CHENNAI, JULY 28 (UNI):- A student breaks down while paying tribute to former president A P J Abdul Kalam at Everwin Matric School, in Chennai on Tuesday. UNI PHOTO-47U

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दूसरी तरफ आज सुबह खलनायक यानी 1993 मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन को फांसी दी गई …

मुझे हमारे कलाम साहब का  कभी भी याकूब मेमन के साथ जीकर नहीं करना चाहिए लेकिन मुझे उन लोगो की वजह से आज कलाम साहब के साथ याकूब का जीकर करना पड रहा जो लोग याकूब मेमन की मौत को धर्म से तौल रहे है …

वेसे तो कहा जाता है की आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता … लेकिन आज के युग में फिर  भी अस्सदूदीन ओवैसी जेसे लोग भारत में धर्म के नाम पर हिन्दू मुस्लमान में फुट डालना चाह रहे है .. और कुछ लोग उसकी बातो में आकर धर्म के नाम पर लड़ रहे है …

कहा जा रहा  है की याकूब मेमन को फांसी उसके मुस्लिम होने की वजह से दी जा रही है लेकिन वो लोग ये नहीं सोचते की उसने जो काम किया है उस हिसाब से तो वो किसी धर्म का कहलाने के लायक नहीं है … आप ही मुझे बताओ की किस धर्म में कह रखा है की – किसी की हत्या करो , किसी को जान से मारो … किसी धर्म की कित्ताब में तो किसी को चोट पहुचाने तक का भी नहीं लिखा है … तो फिर क्यों कुछ लोग याकूब मेमन को धर्म से तोल रहे है जिसने नजाने 250 से ज्यादा निर्दोष मासूम लोगो को मारा   … उनको  उनके परिवार से दूर किया था … उसमे हिन्दू भी थे , मुस्लिम भी , सिख भी और इसाई भी …. फिर भी कुछ लोग अब भी यही मान रहे है की याकूब को मुस्लिम होने की वजह से मारा गया .. उनको यह पता होना चाहिए की सन 1947 के बाद अब तक जितनो को फांसी हुई है उसमे हिन्दू सबसे ज्यादा थे … और फांसी धर्म नहीं …  गिनोने अपराध की वजह से दी जाती है …

एक तरफ डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी के लिए पूरा देश एक होकर रोया … क्या हिन्दू  , क्या मुस्लिम – आंसू सभी के आँखों में थे क्योकि उन्होंने अपने देश के लिए बहुत कुछ किया … जबकि याकूब को गालिया मिल रही थी … क्योकि उसने अपने ही देश को धोखा  दिया … याकूब जेसे लोगो को कलाम साहब से सिख लेनी चाहिए की कर्म अच्छे करे तो मरने के बाद भी लोगो के दिल में हमेशा जिन्दा रह सकते है .. दोनों का  मजहब एक था …लेकिन इंसान मजहब से नहीं कर्म से महान बनता है … सोचो जरा….!

ना हिन्दू बन के जियों ,ना मुसलामन बन के जियों।
अगर जिना है मेरे भाई तो कलाम बन के जियो।
ना हिन्दू रो रहा है, ना मुसलमान रो रहा है
जिसके मरने के बाद सारा हिन्दूस्तान रो रहा है।

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