सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला- IT एक्ट की धारा 66A खत्म!

इंटरनेट पर लिखी गई बातों के चलते होने वाली गिरफ़्तारी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. आज फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कानून से जुड़ी सूचना टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66A की धारा को खत्म कर दिया है. इस धारा के तहत पुलिस को ये अधिकार था कि वो इंटरनेट पर लिखी गई बात के आधार पर किसी को गिरफ्तार कर सकती है.

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए आईटी एक्ट की धारा 66A को निरस्त कर दिया. 66A हालांकि खत्म हो गई है लेकिन फिर भा सोशल मीडिया पर बेलगाम लिखने की आजादी नहीं होगी. हालांकि फेसबुक यूजर्स को अभी भी कानून के दायरे में रहकर ही कमेंट करने होंगे. हालांकि इस धारा के खत्म होने से इंटरनेट पर कुछ लिखने से जुड़े मामलों में अब आनन-फानन में की जाने वाली गिरफ्तारी रुकेगी, जबकि धारा 66A में तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान था.

कोर्ट ने प्रावधान को अस्पष्ट बताते हुए कहा, ‘‘किसी एक व्यक्ति के लिए जो बात अपमानजनक हो सकती है, वो दूसरे के लिए नहीं भी हो सकती है.’’ कोर्ट ने कहा कि सरकारें आती हैं और जाती रहती हैं लेकिन धारा 66 ए हमेशा के लिए बनी रहेगी. कोर्ट ने यह बात केंद्र के उस आश्वासन पर विचार करने से इंकार करते हुए कही जिसमें कहा गया था कि कानून का दुरपयोग नहीं होगा.

अनुच्छेद 66A के तहत दूसरे को आपत्तिजनक लगने वाली कोई भी जानकारी कंप्यूटर या मोबाइल फ़ोन से भेजना दंडनीय अपराध है.

सुप्रीम कोर्ट में दायर कुछ याचिकाओं में कहा गया है कि ये प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ हैं, जो हमारे संविधान के मुताबिक़ हर नागरिक का मौलिक अधिकार है.

इस बहस के बीच सरकार ने अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा. सरकार ने अदालत से कहा कि भारत में साइबर क्षेत्र पर कुछ पाबंदियां होनी ज़रूरी हैं क्योंकि सोशल नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है.

केंद्र सरकार इस कानून के दुरूपयोग को रोकने के लिए पहले ही सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस एडवाइजरी के आधार पर अंतरिम आदेश दिया था कि सूचना टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66A के तहत कोई भी गिरफ़्तारी या कार्रवाई एसपी रैंक से नीचे के अधिकारी की मंज़ूरी के बिना न हो. लेकिन सरकार चाहती है कि कोर्ट अपने फैसले में एसपी रैंक के अधिकारी को बिना किसी मंजूरी के गिरफ्तारी का आदेश दे.

आजम के नाम से कमेंट करने वाले छात्र पर जेल में

यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खान के नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने वाले बरेली के 11वीं की कक्षा के छात्र विक्की को महंगा पड़ा. विक्की पर आरोप है कि उसने आजम खान के नाम से फेसबुक पर आपत्तिजनक कमेंट पोस्ट किए थे.

जिस पर रामपुर क्राइम ब्रांच ने उसके खिलाफ धार्मिक उन्माद पैदा करने और सांप्रदायिकता को बढ़ाने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ मामला दर्ज किया और अब उसे जेल में डाल दिया गया है.

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